दूसरों की पहचान के बल पर कार्य साधने के बजाय अपने ही कार्य और कर्मठता से मौलिक पहचान बनाएं- कुलपति प्रो. दूगड़
लाडनूँ, 18 अगस्त 2026। जैन विश्वभारती संस्थान के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में मंगलवार 18 अगस्त को अध्ययनरत वरिष्ठ छात्राओं द्वारा अपनी नवागंतुक छात्राओं के लिए स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने की। कार्यक्रम में नवागंतुक छात्राओं में से तीन छात्राओं का चयन क्रमशः नवश्री सम्मान, दिवस शोभा सम्मान एवं सौम्या सम्मान के लिए किया गया जिसमें नवश्री सम्मान के लिए सुश्री गार्गी जांगिङ का चयन हुआ वहीं दिवस शोभा सम्मान के लिए सुश्री दीपिका सेन को चुना गया तथा सौम्या सम्मान हेतु सुश्री ईशल छींपा का चयन किया गया।
कुलपति प्रो. दूगड़ ने इस अवसर पर नवागंतुक विद्यार्थियों को मंच से दीक्षारम्भ की शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए कहा कि एक भारतीय होने के नाते विद्यार्थियों को यह गौरव भी होना चाहिए कि उन्हें उस जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में प्रवेश पाया है, जो समूचे विश्व में संस्कृत, प्राकृत एवं भारतीय प्राच्यविद्याओं की परिष्कृति के लिए अपनी मौलिक एवं अनूठी पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने लक्ष्य की प्राप्ति में स्वयं को इतना सक्षम बनायें कि वे जो भी रास्ता चुनें, वह रास्ता औरों के लिए प्रेरणा बन सके और प्रयास करें किसी भी परिस्थिति में दूसरों की पहचान के बल पर कार्य साधने के बजाय अपने द्वारा किए गए कार्य और अपनी कर्मठता से अपनी इक मौलिक पहचान बनाएं, जो दूसरों के लिए आदर्श बन सके। प्रो. दूगड़ ने संस्थान के विद्यार्थियों को देश एवं अपनी भारतीय संस्कृति पर गर्व एवं गौरव अनुभव कराते हुए उन्हें सच्चे आदर्श भारतीय नागरिक बनने की नसीहत भी दी और कहा कि सदैव अपने आप में लीडरशिप के भाव को बनाए रखे,ं क्योंकि वे ही निकट भविष्य में संस्थान के सच्चे एम्बेसडर होंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. बनवारीलाल जैन एवं विशिष्ट अतिथि प्रो. रेखा तिवाङी ने नवागंतुक विद्यार्थियों को मंगलकामनाएँ दीं। प्रारम्भ में प्राचार्य डॉ रविन्द्रसिंह राठौड़ ने पुष्प गुच्छ भेंट कर अतिथियों का सत्कार किया तथा स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का प्रारंभ छात्रा अंजना वर्मा की गणेश-वन्दना से किया गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रगति भटनागर ने किया। कार्यक्रम के दूसरे दौर में छात्राओं नेएकल एवं सामूहिक सांस्कृतिक नृत्यों की प्रस्तुतियाँ दी। कुछ छात्राओं ने प्रेरणादायक कविताएं प्रस्तुत की। वरिष्ठ छात्राओं द्वारा अध्ययनरत अपनी नूतन बहनों के लिए अनेक प्रकार के मनोरंजक खेलों का आयोजन भी किया गया। कुछ नवागंतुक छात्राओं ने महाविद्यालय के संबद्ध में अपने विचार भी साझा किए। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी संकाय सदस्यों की उपस्थिति एवं सहभागिता सराहनीय रही।



