लाडनूँ, 3 अक्टूबर 2026। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के अहिंसा एवं शांति विभाग द्वारा गांधी जयंती के अवसर पर 3 अक्टूबर को समाज में सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक समरसता की विचारधारा को कार्यरूप प्रदान करते हुए कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालस के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तथा सफाई कर्मचारियों को ‘रियल हीरोज’ के रूप में मानते हुए उनका सम्मान किया गया। उनके योगदान को संस्थान के विकास और उत्थान में सबसे महत्वपूर्ण बताया गया। किसी भी संस्थान अथवा निकाय की प्रगति में उसके प्रत्येक कर्मचारी का अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण योगदान होता है। कार्यक्रम में दिलराज सिंह, जगदीश सिंह, नवीन बहादुर, नरेंद्र सिंह, तीर्था घाले, टिल कुमार लालाराम, किशन सेन, अर्जुनराम, मुन्नालाल आदि कर्मचारियों ने संस्थान से जुड़ने के पश्चात के अपने अनुभव साझा किये और संस्थान की कार्य प्रणाली एवं व्यवस्थाओं के प्रति काफी संतुष्टि व्यक्त की। इस अवसर पर राजस्थानी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीकांत व्यास ने इस प्रयास को सामाजिक समरसता का एक महत्वपूर्ण आयाम बताते हुए इन कर्मचारियों के सतत योगदान और निष्ठा की सराहना की। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने अपने उद्बोधन में बताया कि किसी भी संस्थान में कोई कर्मचारी छोटा-बड़ा नहीं होता, हर कर्मचारी का अपनी जगह महत्वपूर्ण स्थान एवं योगदान होता है। अतः सभी की अपने-अपने स्थान पर गरिमा एवं महत्व होता है। संस्थान के कुलसचिव देबाशिश गोस्वामी ने इन कर्मचारियों के योगदान को उल्लेखित करते हुए कहा कि संस्थान की गतिविधियों के सुचारू रूप से संचालित होने में न केवल अधिकारियों का अपितु हर स्तर के कर्मचारियों का भी उतना ही योगदान बना रहता है। आप सभी अपने-अपने दायित्वों का निर्वाह करते हैं तभी संस्थान की सभी सफाई एवं स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाएं बनी रह पाती। अहिंसा एवं शांति विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. वंदना कुंडलिया ने इस कार्यक्रम में सभी का स्वागत एवं अभिनन्दन किया और कार्यक्रम की रूपरेखा रखी। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. लिपि जैन ने किया।



