लाडनूँ, 25 सितम्बर 2026। जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग में “कार्बन मुक्त हरित परिसर” विषय पर विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन के सान्निध्य में एक व्याख्यान का का आयोजन किया गया। व्याख्यान की प्रस्तुति डॉ. अनुजा कुमारी, सहायक आचार्य, भौतिक विज्ञान, शिक्षा विभाग द्वारा दी गई। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के शिक्षकगण एवं छात्राध्यापिकाएँ उपस्थित रहे। व्याख्यान में डॉ. अनुजा कुमारी ने बताया कि जीवाश्म ईंधन के अत्यधिक दहन से उत्सर्जित ग्रीन हाउस गैसें वायुमंडल में एकत्रित होकर पृथ्वी के तापमान को निरंतर बढ़ा रही हैं, जिसका सीधा प्रभाव स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, जल संसाधन, जैव विविधता तथा शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने आईपीसीसी प्च्ब्ब् एवं डब्लूएचओ ॅभ्व् की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि तापमान में प्रत्येक वृद्धि जलवायु जोखिम को और अधिक बढ़ा देती है। डॉ. कुमारी ने “कार्बन फुटप्रिंट” की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए बताया कि यह विद्युत उपयोग, परिवहन एवं अपशिष्ट प्रबंधन से उत्पन्न कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (ब्व्2म) को दर्शाता है। उन्होंने परिसर उत्सर्जन के तीन प्रमुख स्रोतों- प्रत्यक्ष उत्सर्जन (स्कोप-1), क्रय विद्युत (स्कोप-2) तथा मूल्य श्रृंखला उत्सर्जन (स्कोप-3) की विस्तार से जानकारी दी तथा “कार्बन मुक्त” एवं “नेट-जीरो” के बीच के अंतर को उदाहरण सहित समझाया। डॉ. कुमारी ने परिसर को पर्यावरण-अनुकूल बनाने हेतु चार प्रमुख क्षेत्रों भवन एवं ऊर्जा, आवागमन, खाद्य एवं अपशिष्ट प्रबंधन तथा क्रय नीतिकृमें किए जा सकने वाले प्रभावी उपायों पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने हाल के शोध निष्कर्षों को साझा करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय परिसरों में विद्युत एवं परिवहन उत्सर्जन सर्वाधिक होता है, जबकि स्कोप-3 उत्सर्जन प्रायः कम आँका जाता है। उन्होंने कहा कि भावी शिक्षक कार्बन साक्षरता के माध्यम से न केवल स्वयं जिम्मेदार आचरण अपना सकते हैं, बल्कि अपने विद्यार्थियों एवं समुदाय को भी जागरूक कर व्यापक परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने पुनः प्रयोज्य वस्तुओं के उपयोग, शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता, अपशिष्ट पृथक्करण, पैदल-साइकिल अथवा सार्वजनिक परिवहन के उपयोग तथा टिकाऊ क्रय नीति के समर्थन जैसे छोटे किंतु प्रभावी कदम अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी उपस्थित जनों से परिसर को स्वच्छ, हरित एवं सुरक्षित बनाए रखने में सक्रिय योगदान देने की अपील की। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी. एल. जैन ने छात्राध्यापिकाओं से आग्रह किया कि वे इस महत्वपूर्ण विषय का अनुसरण करें तथा इस पर अत्यंत संवेदनशीलता के साथ गंभीरतापूर्वक चिंतन करें। प्रो. जैन ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु अपने स्तर पर आवश्यक एवं ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि पर्यावरण के प्रति उनका दायित्व सार्थक रूप ले सके। कार्यक्रम में सभी संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।



