लाडनूूँ, 13 अगस्त 2026। जैन विश्वभारती संस्थान के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के अन्तर्गत प्राचार्य डॉ. रवीन्द्रसिंह राठौड़ की अध्यक्षता में सत्र 2026-27 के अंतर्गत प्रवेश लेने वाली नवागंतुक छात्राओं के लिए त्रिदिवसीय दीक्षारम्भ कार्यक्रम के तृतीय दिन को क्रमशः तीन चरणो में संचालित किया गया, जिसके प्रथम चरण में तहसीलदार श्रीमती कुटेन्द्र राठौड़ मुख्य अतिथि व विश्वविद्यालय के राजस्थानी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एल. के. व्यास अतिथि वक्ता रहे। तहसीलदार कुटेन्द्र राठौङ ने अपने वक्तव्य में कहा कि स्त्री अपने आपको अबला समझने के बजाय वाणी की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती के रूप में, जीवन को अर्थवत्ता प्रदान करने वाली देवी लक्ष्मी के रूप में तथा इस चराचर जगत की संचालिका शक्ति माँ दुर्गा के रूप में अपने भीतर के अस्तित्व को तलाश करती है तो संसार की कोई भी बाधा उसके आत्मविश्वास के आगे नहीं ठहर सकती। उन्होंने छात्राओं को सम्पूर्ण समर्पण भाव के साथ लक्ष्य निर्धारित करने और स्वावलंबन के साथ अपने पैरों पर खड़ा होने की नसीहत दी तथा अपनी प्रतिभा के बल पर अपनी व्यक्तिगत पहचान को परिवार एवं समाज में स्थापित करने पर बल दिया।
कार्यक्रम में राजस्थानी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एल. के. व्यास ने अतिथि वक्ता के रूप में कहा कि स्त्री समाज की वह धुरी है, जिसकी वजह से समाज के सम्पूर्ण संचालन को गति मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्थान का प्राणतत्व स्वीकार करते हुए उन्हें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने एवं विद्यार्थी वर्ग में धीरे-धीरे तिरोहित होती जा रही लिखने की आदत को पुनः विकसित करने की प्रेरणा भी दी। उन्होंने नेल्सन मण्डेला एवं सुनील गावस्कर का उदाहरण देते हुए छात्राओं को सकारात्मकता महत्व भी बताते हुए इसे शारीरिक एवं मानसिक दोनों ही प्रकार की उर्जा संवर्धन हेतु कारगर बताया। प्रो. व्यास ने बताया कि असफलता भी हमें जीवन में बहुत कुछ सिखाती है, अतः जीवन की बाधाओं एवं असफलताओं से भी सीखकर जीवन को बेहतर बनाने का संकल्प लेना चाहिए। कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. राठौड़ ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया तथा कार्यक्रम में आगन्तुक अतिथि वक्ताओं का संस्थान के प्रतीक चिन्ह, शाल्यार्पण एवं पुष्प गुच्छ प्रदान कर अभिनंदन किया।
कार्यक्रम के द्वितीय चरण में सभी विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के तहत संचालित आचार्य महाप्रज्ञ मेडिकल कॉलेज ऑफ नैचुरोपैथी एण्ड योग का अवलोकन किया। इस दौरान आचार्य महाप्रज्ञ नेचुरोपैथी सेन्टर, लाडनूं के विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार शर्मा ने पाँच तत्वों से बने इस शरीर के अस्तित्व की महत्ता बताते हुए इसे स्वस्थ रखने हेतु आहार संतुलन, आसन- प्राणायाम आदि को ही स्वस्थ शरीर के भीतर मौजूद स्वस्थ मस्तिष्क होने का राज स्वीकार किया। द्वितीय चरण में ही नवागंतुक सभी विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के केन्द्रीय पुस्तकालय एवं जैन विश्व भारती कैम्पस में मौजूद आचार्य तुलसी आर्ट गैलरी का अवलोकन भी किया।
महाविद्यालय प्रार्थना सभागार में समापन समारोह का आयोजन किया गया जिसमें छात्राओं के साथ समस्त संकाय सदस्यों की सहभागिता रही। समापन समारोह में अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. रेखा तिवाङी ने छात्राओं को सम्बोधित किया। कार्यक्रम के तृतीय चरण में डॉ. नन्दिनी जांगिङ ने नवागंतुक छात्राओं को प्रेक्षाध्यान एवं योग का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया। साथ ही अनेक छात्राओं ने भी त्रिदिवसीय दीक्षारम्भ कार्यक्रम के सम्बन्ध में अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के अन्त में सभी छात्राओं हेतु संस्थान की ओर से अल्पाहार की व्यवस्था भी की गई। कार्यक्रम का संचालन हिन्दी संकाय सदस्य अभिषेक चारण ने किया तथा संकाय सदस्या डॉ. प्रगति भटनागर ने धन्यवाद ज्ञापित किया।



