लाडनूँ, 14 सितम्बर 2026। जैन विश्व भारती संस्थान के शिक्षा विभाग द्वारा गणेश चतुर्थी एवं हिंदी दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभाग की सह आचार्य डॉ. आभा सिंह ने कहा कि भारत एक सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत वाला देश है, जहाँ अनेक पर्व, त्यौहार तथा मेले आयोजित किये जाते हैं, जो हमारी सामाजिक एकता एवं सांस्कृतिक विविधता के पोषक हैं। देश के विभिन्न भागों में प्रसिद्ध गणेश मंदिरों के बारे में बताते हुए कहा कि गणेश जी प्रथम पूज्य हैं और उनकी कृपा से सभी विघ्न एवं संकट दूर हो जाते हैं। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, सभ्यता और जीवन-मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति है। हिंदी देश की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोती है। उन्होंने हिंदी के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लेने तथा ज्ञान, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्रों में इसे और सशक्त बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. गिरधारी लाल शर्मा ने कहा कि भगवान गणपति बुद्धि एवं सिद्धि के देवता माने गये हैं, जिनकी कृपा से हमारे जीवन में सुख एवं समृद्धि का भंडार भरता है, उनका गजमुख कुशाग्र बुद्धि का संकेत है और हमें सदैव बुद्धिमान एवं ज्ञानवान बनने हेतु प्रेरित करता है। देशभर में मनाए जा रहें हिन्दी दिवस को 1949 में इसी दिन संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी को देश की आधिकारिक भाषा के तौर पर अपनाया था। हिंदी जनसंचार, सुशासन और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सभी भारतीय भाषाओं के साथ आगे बढ़ते हुए हिंदी अब प्रौद्योगिकी और अनुसंधान की भाषा भी बन रही है। कार्यक्रम का शुभारम्भ सभी संकाय सदस्यों द्वारा भगवान गणपति के माल्यार्पण एवं पूजन के साथ हुआ। इस अवसर पर मीनाक्षी पारीक, भैरवी पारीक, सिद्धी पारीक, हर्षिता पारीक तथा लीलावती सारण ने विचाराभिव्यक्ति, कविता एवं भजन आदि की प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम में सभी संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मंच संचालन एवं आभार ज्ञापन डॉ. गिरधारी लाल शर्मा द्वारा किया गया।



