लाडनूँ,14 सितम्बर 2026। जैन विश्व भारती संस्थान के अन्तर्गत संचालित राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई प्रथम एवं द्वितीय इकाई के संयुक्त तत्वावधान में हिन्दी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम अध्यक्ष एवं आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रविन्द्रसिंह राठौड़ ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हिन्दी दिवस को साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने वाला अनूठा दिवस बताते हुए कहा कि कबीर, तुलसी, सूरदास से लेकर प्रेमचंद, दिनकर और महादेवी वर्मा तक हिंदी भाषा की एक समृद्ध साहित्य और सांस्कृतिक परम्परा रही है जिसे इस दिवस के जरिए वर्तमान युवा पीढ़ी तक पहुंचाकर हम उन्हें अपनी इस साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत से उन्हें जोड़ सकते हैं। डॉ. राठौड़ ने कहा कि वर्तमान समय में हिंदी केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आज हमारी इस मातृभाषा की स्वीकार्यता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रही है। डिजिटल माध्यमों, सिनेमा और व्यापार आदि में इसका वैश्विक महत्व बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि हिंदी दिवस महज एक औपचारिकता निभाने का उत्सव नहीं है, अपितु यह अपनी भाषाई जड़ों से जुड़ने व अपने स्वाभिमान को बनाए रखने के साथ साथ देश में प्रशासनिक एवं सामाजिक संवाद को सरल और सुलभ बनाने का एक सशक्त माध्यम है। कार्यक्रम में हिन्दी सहायक आचार्य अभिषेक चारण ने कहा कि हिंदी देश में सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है, जो विविध राज्यों और संस्कृतियों को आपस में जोड़ने का काम करती है। उन्होंने इस दौरान हिन्दी के अन्तर्गत आधुनिक काल के प्रणेता के रूप में अपनी अनूठी पहचान रखने वाले रचनाकार भारतेंदु हरिश्चंद्र को उद्धृत करते हुए उनकी प्रसिद्ध पंक्ति ‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल’ का भावार्थ करते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसकी अपनी भाषा के विकास के बिना अधूरी है। अतः अपनी मातृभाषा और राजभाषा का सम्मान करना देश के प्रत्येक नागरिक का पहला कर्तव्य होना चाहिए। कार्यक्रम में गार्गी, योगिता, नाजीया, वंशिका, कृष्णा, अभिरुचि, सलोनी स्वामी, खुशबू गोदारा आदि छात्राओं ने भी हिन्दी दिवस पर अपने प्रेरक भाषण, कविता, कहानियों के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के दौरान मधुकर दाधीच, प्रेयस सोनी, मधुकर दाधीच, मनीष पारीक, विनय पंवार आदि उपस्थित रहे ।कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रगति भटनागर ने किया।



