लाडनूँ, 8 सितम्बर 2026। जैन विश्वभारती संस्थान में कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के संरक्षण तथा मार्गदर्शन में अहिंसा एवं शांति विभाग द्वारा पर्यूषण महापर्व 2026 के अवसर पर विशेष व्याख्यान श्रृंखला का शुभारंभ किया गया। इस दौरान प्रथम दिन खाद्य संयम दिवस के रूप में मनाया गया, जिसमें शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल.जैन तथा आचार्य महाप्रज्ञ नेचुरोपैथी मेडिकल कॉलेज की डॉ. नीलम राठौड़ मुख्य वक्ता रहे। कार्यक्रम के शुभारंभ में मीनाक्षी बाफना तथा समूह ने ‘पर्यूषण पर्व का हुआ है आगमन’ गीतिका प्रस्तुत की। तत्पश्चात डॉ. नीलम राठौड़ ने अपने उद्बोधन में दैनिक जीवन में आहार संबंधी संयम के विविध पहलुओं पर विचार प्रस्तुत किये तथा बताया कि यदि हम दैनिक भोजन में कुछ सावधानियां बरते तथा संतुलित एवं संयमित आहार ग्रहण करें तो स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से बच सकते हैं। डॉ .राठौड़ ने खाद्य संयम दिवस के वैज्ञानिक आधार को स्पष्ट करते हुए बताया कि ऋतु परिवर्तन के कारण वात, पित्त और कफ में भी बदलाव आते हैं, अतः इस समय भोजन में संयम तथा सजगता रखना आवश्यक है। उत्तम स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त पानी पीने की भी सलाह देते हुए कहा कि हमें हमेशा गुनगुना पानी पीना चाहिए, उससे हम अधिकांश बीमारियों से बच सकते हैं। उन्होंने बताया कि हमें अपने शरीर की आवश्यकता के अनुरूप सीमित आहार लेना चाहिए और सभी आवश्यक खाद्य पदार्थों का समावेश आहार में होना आवश्यक है। प्रो. जैन ने इस अवसर पर कुछ विविध व्यवहारिक पहलुओं को उजागर करते हुए बताया कि हमें भोजन के प्रति संयम रखना चाहिए तथा संतुलित एवं सीमित मात्रा में भोजन लेना चाहिए। भोजन करने के दौरान जल्दबाजी न करने, फास्ट फूड खाद्य सामग्री से बचने और सात्विक भोजन की परंपरा को अपनाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि भोजन करने का निश्चित समय होना चाहिए और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिए गरिष्ठ खाद्य पदार्थों का कम सेवन करना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने अपने जीवन के अनुभव भी साझा किये और बताया कि भोजन सामग्री एवं भोजन शैली में परिवर्तन करके स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है। इस अवसर पर सभी विभागों के विभागाध्यक्ष एवं संकाय सदस्य भी उपस्थित रहे। विभागाध्यक्ष प्रो. वंदना कुंडलिया ने इस कार्यक्रम के आयोजन में सभी के सक्रिय सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया और आगामी अलग-अलग दिवसों की आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। साथ ही सभी प्रतिभागियों को खाद्य संयम से जुड़े हुए छोटे-छोटे सूत्र भी लिखकर दिए गए जिनसे खाद्य संयम की परंपरा को जीवन में अपनाया जा सकता है। कार्यक्रम का संयोजन विभाग की सहायक आचार्य डॉ. लिपि जैन ने किया और पर्यूषण पर्व के महत्व एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह महापर्व आत्म-चिंतन, तप, संयम और क्षमापना का पर्व है जो न केवल जैन समाज के लिए अपितु जन-जन के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है। इस अवसर पर अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रेखा तिवाड़ी, जैन एवं तुलनात्मक धर्म तथा दर्शन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रामदेव साहू सभी विभागों के संकाय सदस्य तथा करीब 250 विद्यार्थी एवं शोधार्थी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजन में आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य तथा विभाग के सह-आचार्य डॉ. रविंद्र सिंह राठौड़, सहायक आचार्य डॉ. बलबीर सिंह तथा डॉ. रवीना टैगोर का भी योगदान रहा।



