JVBI
JVBI Assistant
Online • Reply in 1 min
Enquiry Now
NAAC A Grade
ISO 9001:2015
34+ Years of Excellence
Apply Online
Call : 9461239683

Enquire Now

Our team will contact you shortly.

️ +91
6 + 6
Back to News
General

आदर्श जीवन के लिए वाणी का संयम है आवश्यक- प्रो.लक्ष्मीकांत व्यास

लाडनूँ, 11 सितम्बर 2026। जैन विश्वभारती संस्थान में कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के संरक्षण तथा मार्गदर्शन में चल रहे पर्युषण महापर्व 2026 के अन्तर्गत आयोजित कार्यक्रमों के चैथे दिन अहिंसा एवं शांति विभाग द्वारा ष्हमारे शब्द,हमारी जिम्मेदारीष् थीम पर आधारित ‘वाणी संयम दिवस’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ में छात्रा योगिता और तनिष्का ने मधुर स्वरों में ‘पर्युषण आयो रे, सबके मन भायो रे’ राजस्थानी भाषा में गीत प्रस्तुत किया। इसके पश्चात राजस्थानी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एल.के. व्यास ने वाणी संयम दिवस पर बताया कि वाणी संयम का अर्थ है, मन को नियंत्रण में करना। यदि हम बौद्धिक स्थिरता को अपनाते हैं तो वाणी संयम की प्रवृत्ति आसानी से विकसित हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया मन का संयमित होना वाणी संयम की पूर्व शर्त है, अर्थात यदि हम अपने मन को नियंत्रित कर लेते हैं तो निश्चित रूप से हम अपनी वाणी को भी संयम में कर सकते हैं। संयमित वाणी मनुष्य की विशिष्ट पहचान होती है। वाणी ही मनुष्य के संस्कारों की प्रतिबिम्ब होती है, अतः वाणी का संयम होना जीवन में अति आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हमारी वाणी में कभी भी कड़वापन नहीं होना चाहिए, क्योंकि वाणी की मधुरता दूसरों को मोहित करने में काफी महत्वपूर्ण होती है। जैन एवं तुलनात्मक धर्म तथा दर्शन विभाग की सहायक आचार्य ईरीया जैन ने संयमित वाणी आचरण को जीवन में काफी उपयोगी माना और वाणी संयम के चार आयाम बताए, जिनमें सत्याणुव्रत, सत्यमहाव्रत, भाषा समिति तथा वचनगुप्ति का उल्लेख किया और बताया कि यह चारों ही आयाम वाणी संयम के दार्शनिक तत्व भी माने जा सकते हैं। वाणी संयम का यह दिवस हमें अनावश्यक एवं अकारण न बोलने के लिए प्रेरित करता है। इस दिवस के व्यावहारिक सत्र का संचालन विभागाध्यक्ष प्रो. वंदना कुंडलिया ने किया। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों के लिए वाणी संयम, वाणी मधुरता और क्या बोलें, कैसे बोलंे के विविध व्यावहारिक व रूचिकर प्रयोग भी करवाए। कार्यक्रम का संयोजन आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य एवं विभाग के सह-आचार्य डॉ. रविंद्र सिंह राठौड़ ने किया। इस अवसर पर संस्थान के ओएसडी प्रो. अशोक जैतावत, अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रेखा तिवाड़ी, शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन, योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. युवराज सिंह खंगारोत, जैन एवं तुलनात्मक धर्म तथा दर्शन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.रामदेव साहू आदि के साथ सभी विभागों के संकाय सदस्यों सहित करीब 285 विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की आयोजना में विभाग की सहायक आचार्य डॉ. लिपि जैन, डॉ. बलबीर सिंह, डॉ. रवीना टैगोर एवं विद्यार्थियों की भी सक्रिय भूमिका रही।

Share:
Latest News