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समारोह पूवर्क मनाया क्षमापना दिवस

समारोह पूवर्क मनाया क्षमापना दिवस

शुद्ध मन से क्षमा याचना से मन शुद्ध होता है- कुलपति प्रो. दूगड़

लाडनंँ, 20 सितम्बर 2023। जैन विश्वभारती संस्थान के महाप्रज्ञ सभागार में समारोह पूर्वक पर्युषण महापर्व के अंतिम दिवस क्षमापना पर्व के रूप में मनाया गया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि जैन धर्म में पूर्ण आत्मिक पर्व के रूप में मानाया जाने वाला यह पर्व जीवन में बैर भाव को नष्ट कर मैत्री को बढाने वाला है। उन्होंने कहा कि यह दिन प्राणी मात्र के लिए कल्याणकारी है। शुद्ध मन के साथ परस्पर क्षमा याचना करने से मन शुद्ध होता है, वही आत्मिक विकास का द्वार खुलता है। प्रो. दूगड़ ने संसार के सभी प्राणियों के साथ मैत्री की भावना रखने का संदेश देते हुए कहा क्षमा मांगना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी क्षमा प्रदान करना भी है। इस अवसर पर कुलपति प्रो. दूगड़ ने उपस्थित विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों को एक-दूसरे से क्षमायाचना करने की प्रेरणा देते हुए स्वयं ने भी सभी से शुद्ध मन से क्षमायाचना की। इससे पूर्व सस्थान के विशेषाधिकारी प्रो. नलिन के. शास्त्री ने वर्षभर के दौरान जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए सृष्टि के समस्त प्राणियों से हाथ जोड़कर क्षमायाचना करते हुए सभी से ‘मिच्छामी दुक्कड़म’ कहकर क्षमायाचना की। दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक व आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि यह पर्व केवल जैन समाज ही नहीं बल्कि विश्व के सभी लोगों के लिए प्रेरणा प्रदान करने वाला है। प्राकृत एवं संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. जिनेन्द्र जैन, वित्ताधिकारी आर.के. जैन, अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रेखा तिवारी, योग एवं जीवन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत, अहिंसा एवं शांति विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रविन्द्र सिंह राठौड़ आदि ने भी अपने-अपने विभाग की ओर से क्षमायाचना करते हुए पर्व की महत्ता पर प्रकाश डाला। छात्रा रेणु मनोत ने क्षमापना पर्व पर कविता प्रस्तुत की। अंत में कुलसचिव प्रो. बीएल जैन ने आभार ज्ञापन करते हुए इस पर्व को विश्व का अनूठा पर्व बताया। कार्यक्रम का कुशल संयोजन डॉ. युवराजसिंह खंगारोत ने किया। समारोह में सभी विभागों के विद्यार्थी, शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

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